अन्वयः
चन्द्रसूर्यांशुसङ्काशः bright like the radiance of Sun and Moon, सागराम्बुसमाश्रयः surrounded by seawater, अम्बरम् sky, विपुलैः with extended, शृङ्गैः with the peaks, विलिखन्निव as if scratching, भ्राजते shines.
Summary
'It looks bright, spreading its radiance like the Sun and Moon. It is surrounded by the sea. Its peaks appear as though scratching the sky.
पदच्छेदः
| चन्द्रसूर्यांशुसंकाशः | चन्द्र–सूर्य–अंशु–संकाश (१.१) |
| सागराम्बुसमावृतः | सागर–अम्बु–समावृत (√समा-वृ + क्त, १.१) |
| भ्राजते | भ्राजते (√भ्राज् लट् प्र.पु. एक.) |
| विपुलैः | विपुल (३.३) |
| शृङ्गैर् | शृङ्ग (३.३) |
| अम्बरं | अम्बर (२.१) |
| विलिखन्न् | विलिखत् (√वि-लिख् + शतृ, १.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| च | न्द्र | सू | र्यां | शु | सं | का | शः |
| सा | ग | रा | म्बु | स | मा | वृ | तः |
| भ्रा | ज | ते | वि | पु | लैः | शृ | ङ्गै |
| र | म्ब | रं | वि | लि | ख | न्नि | व |