पदच्छेदः
| सर्पराजो | सर्प–राज (१.१) |
| महाघोरो | महत्–घोर (१.१) |
| यस्यां | यद् (७.१) |
| वसति | वसति (√वस् लट् प्र.पु. एक.) |
| वासुकिः | वासुकि (१.१) |
| निर्याय | निर्याय (√निः-या + ल्यप्) |
| मार्गितव्या | मार्गितव्य (√मार्ग् + कृत्, १.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सा | तद् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| भोगवती | भोगवती (१.१) |
| पुरी | पुरी (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | र्प | रा | जो | म | हा | घो | रो |
| य | स्यां | व | स | ति | वा | सु | किः |
| नि | र्या | य | मा | र्गि | त | व्या | च |
| सा | च | भो | ग | व | ती | पु | री |