पदच्छेदः
| राघवप्रियकामार्थं | राघव–प्रिय–काम–अर्थ (२.१) |
| घातयिष्यत्य् | घातयिष्यति (√घातय् लृट् प्र.पु. एक.) |
| असंशयम् | असंशय (२.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| क्षमं | क्षम (१.१) |
| चापराद्धानां | च (अव्ययः)–अपराद्ध (√अप-राध् + क्त, ६.३) |
| गमनं | गमन (१.१) |
| स्वामिपार्श्वतः | स्वामिन्–पार्श्व (५.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | घ | व | प्रि | य | का | मा | र्थं |
| घा | त | यि | ष्य | त्य | सं | श | यम् |
| न | क्ष | मं | चा | प | रा | द्धा | नां |
| ग | म | नं | स्वा | मि | पा | र्श्व | तः |