अन्वयः
ततः then, जटायुषः Jatayu's, ज्येष्ठः भ्राता elder brother, महातेजाः very glorious, वानरान् monkeys, अत्मानुरूपम् in a befitting manner, वचनम् these words, अब्रवीत् said, सम्प्रहर्षयन् while pleasing them.
M N Dutt
Thereat, rejoicing the monkeys, the exceedingly energetic elder brother of Jațāyu spoke words worthy of him.
Summary
Then Jatayu's elder brother, the glorious Sampati, said these pleasing, befitting words:
पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽब्रवीन् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| महातेजा | महत्–तेजस् (१.१) |
| ज्येष्ठो | ज्येष्ठ (१.१) |
| भ्राता | भ्रातृ (१.१) |
| जटायुषः | जटायुस् (६.१) |
| आत्मानुरूपं | आत्मन्–अनुरूप (२.१) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| वानरान् | वानर (२.३) |
| संप्रहर्षयन् | संप्रहर्षयत् (√संप्र-हर्षय् + शतृ, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तो | ऽब्र | वी | न्म | हा | ते | जा |
| ज्ये | ष्ठो | भ्रा | ता | ज | टा | यु | षः |
| आ | त्मा | नु | रू | पं | व | च | नं |
| वा | न | रा | न्सं | प्र | ह | र्ष | यन् |