अस्माकमपि सौवर्णं दिव्यं चक्षुर्बलं तथा ।
तस्मादाहारवीर्येण निसर्गेण च वानराः ।
आयोजनशतात्साग्राद्वयं पश्याम नित्यशः ॥
अस्माकमपि सौवर्णं दिव्यं चक्षुर्बलं तथा ।
तस्मादाहारवीर्येण निसर्गेण च वानराः ।
आयोजनशतात्साग्राद्वयं पश्याम नित्यशः ॥
अन्वयः
वानराः O monkeys, तस्मात् therefore, वयम् we, आहारवीर्येण with the strength of our food, निसर्गेण च and by nature, साग्रात् from the edge, आयोजनशतात् up to a hundred yojanas, नित्यशः always, पश्याम we can see.M N Dutt
For this reason, as well as owing to the energy consequent on our feeding on certain kinds of flesh, we, you monkeys, can see a little further than an hundred Yojanas.Summary
'O monkeys therefore, by the strength of food and by nature we can always see beyond a hundred yojanas from this edge.पदच्छेदः
| अस्माकम् | मद् (६.३) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| सौवर्णं | सौवर्ण (१.१) |
| दिव्यं | दिव्य (१.१) |
| चक्षुर्बलं | चक्षुस्–बल (१.१) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| तस्माद् | तद् (५.१) |
| आहारवीर्येण | आहार–वीर्य (३.१) |
| निसर्गेण | निसर्ग (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| वानराः | वानर (८.३) |
| योजनशतात् | योजन–शत (५.१) |
| साग्राद् | साग्र (५.१) |
| वयं | मद् (१.३) |
| पश्याम | पश्याम (√पश् लोट् उ.पु. द्वि.) |
| नित्यशः | नित्यशस् (अव्ययः) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्मा | क | म | पि | सौ | व | र्णं | दि | व्यं | च | क्षु |
| र्ब | लं | त | था | त | स्मा | दा | हा | र | वी | र्ये | ण |
| नि | स | र्गे | ण | च | वा | न | राः | आ | यो | ज | न |
| श | ता | त्सा | ग्रा | द्व | यं | प | श्या | म | नि | त्य | शः |