M N Dutt
How can a bird bereft of wings, undertake any thing? But listen! I will tell you as to what I am capable of through speech, intellect and merit, and what you can exèrt your manliness in.
पदच्छेदः
| अपक्षो | अपक्ष (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| कथं | कथम् (अव्ययः) |
| पक्षी | पक्षिन् (१.१) |
| कर्म | कर्मन् (२.१) |
| किंचिद् | कश्चित् (२.१) |
| उपक्रमेत् | उपक्रमेत् (√उप-क्रम् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| यत् | यद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| शक्यं | शक्य (१.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| कर्तुं | कर्तुम् (√कृ + तुमुन्) |
| वाग्बुद्धिगुणवर्तिना | वाच्–बुद्धि–गुण–वर्तिन् (३.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | प | क्षो | हि | क | थं | प | क्षी |
| क | र्म | किं | चि | दु | प | क्र | मेत् |
| य | त्तु | श | क्यं | म | या | क | र्तुं |
| वा | ग्बु | द्धि | गु | ण | व | र्ति | ना |