श्रूयतां तत्प्रवक्ष्यामि भवतां पौरुषाश्रयम् ।
वाङ्मतिभ्यां हि सार्वेषां करिष्यामि प्रियं हि वः ।
यद्धि दाशरथेः कार्यं मम तन्नात्र संशयः ॥
श्रूयतां तत्प्रवक्ष्यामि भवतां पौरुषाश्रयम् ।
वाङ्मतिभ्यां हि सार्वेषां करिष्यामि प्रियं हि वः ।
यद्धि दाशरथेः कार्यं मम तन्नात्र संशयः ॥
अन्वयः
सर्वेषाम् for all of you, वः to you, वाङ्मतिभ्याम् by word and thought, प्रियम् dear to you, करिष्यामि I will do, यत् हि whatever, दाशरथेः to Dasarathi, कार्यम् is the task, तत् that, मम to me, अत्र there, संशयः doubt, न not.M N Dutt
I will do what is agreeable to you by my words and my and my intention. That which is Dasarathi's work is also mine. Of this there is no doubt.Summary
'I will please you with my word and thought and do not doubt that Rama's task is dear to me as well.पदच्छेदः
| श्रूयतां | श्रूयताम् (√श्रु प्र.पु. एक.) |
| तत् | तद् (२.१) |
| प्रवक्ष्यामि | प्रवक्ष्यामि (√प्र-वच् लृट् उ.पु. ) |
| भवतां | भवत् (६.३) |
| पौरुषाश्रयम् | पौरुष–आश्रय (१.१) |
| वाङ्मतिभ्यां | वाच्–मति (३.२) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| सर्वेषां | सर्व (६.३) |
| करिष्यामि | करिष्यामि (√कृ लृट् उ.पु. ) |
| प्रियं | प्रिय (२.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| वः | त्वद् (६.३) |
| यद्धि | यद् (१.१)–हि (अव्ययः) |
| दाशरथेः | दाशरथि (६.१) |
| कार्यं | कार्य (१.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| तन्नात्र | तद् (१.१)–न (अव्ययः)–अत्र (अव्ययः) |
| संशयः | संशय (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्रू | य | तां | त | त्प्र | व | क्ष्या | मि | भ | व | तां | पौ |
| रु | षा | श्र | यम् | वा | ङ्म | ति | भ्यां | हि | सा | र्वे | षां |
| क | रि | ष्या | मि | प्रि | यं | हि | वः | य | द्धि | दा | श |
| र | थेः | का | र्यं | म | म | त | न्ना | त्र | सं | श | यः |