अन्वयः
ततः then, रामः Rama, प्रियवादिनम् a man of pleasant word, तं सुग्रीवम् that Sugriva, अब्रवीत् said, सखे O friend, शीघ्रम् quickly, आनयस्व you may get, किमर्थम् why do you, प्रविलम्बसे delay
M N Dutt
There upon Rāma spoke to the sweetspeeched Sugrīva, 'Bring (them), at once, my friend. Why did you tarry?'
Summary
Rama then said to Sugriva, one who used pleasing words, 'O my friend why delay? Get them here immediately'.
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| रामः | राम (१.१) |
| सुग्रीवं | सुग्रीव (२.१) |
| प्रियवादिनम् | प्रिय–वादिन् (२.१) |
| आनयस्व | आनयस्व (√आ-नी लोट् म.पु. ) |
| सखे | सखि (८.१) |
| शीघ्रं | शीघ्र (२.१) |
| किमर्थं | क (२.१)–अर्थ (२.१) |
| प्रविलम्बसे | प्रविलम्बसे (√प्रवि-लम्ब् लट् म.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | म | ब्र | वी | त्त | तो | रा | मः |
| सु | ग्री | वं | प्रि | य | वा | दि | नम् |
| आ | न | य | स्व | स | खे | शी | घ्रं |
| कि | म | र्थं | प्र | वि | ल | म्ब | से |