अन्वयः
तं जटायुषम् that Jatayu, जनस्थाने at Janasthana, निपतितम् fell down, आशङ्के I guess, अहं तु but I, दग्धपक्षः with burnt wings, जडीकृतः devoid of consciousness, विन्ध्ये on Vindhya, पतितः fell.
Summary
'I thought Jatayu had fallen down somewhere at Janasthana, but I fell on Vindhya, wings burnt, in an unconscious state.
पदच्छेदः
| आशङ्के | आशङ्के (√आ-शङ्क् लट् उ.पु. ) |
| तं | तद् (२.१) |
| निपतितं | निपतित (√नि-पत् + क्त, २.१) |
| जनस्थाने | जनस्थान (७.१) |
| जटायुषम् | जटायुष (२.१) |
| अहं | मद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| पतितो | पतित (√पत् + क्त, १.१) |
| विन्ध्ये | विन्ध्य (७.१) |
| दग्धपक्षो | दग्ध (√दह् + क्त)–पक्ष (१.१) |
| जडीकृतः | जडीकृत (√जडी-कृ + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| आ | श | ङ्के | तं | नि | प | ति | तं |
| ज | न | स्था | ने | ज | टा | यु | षम् |
| अ | हं | तु | प | ति | तो | वि | न्ध्ये |
| द | ग्ध | प | क्षो | ज | डी | कृ | तः |