अन्वयः
मया by me, पक्षाभ्याम् with wings, गुप्तः protected, जटायुः Jatayu, न प्रदह्यते was not burnt, तत्र there, प्रमादात् miserably, वायुपथात् from the path of the wind, पतन् while falling down, अहम् I, निर्दग्धः got burnt.
Summary
'I protected Jatayu with my wings so that he was not burnt. I, however, got burnt miserably and fell down from the aerial region.
पदच्छेदः
| पक्षिभ्यां | पक्षिन् (३.२) |
| च | च (अव्ययः) |
| मया | मद् (३.१) |
| गुप्तो | गुप्त (√गुप् + क्त, १.१) |
| जटायुर् | जटायुस् (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| प्रदह्यत | प्रदह्यत (√प्र-दह् प्र.पु. एक.) |
| प्रमादात् | प्रमाद (५.१) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| निर्दग्धः | निर्दग्ध (√निः-दह् + क्त, १.१) |
| पतन् | पतत् (√पत् + शतृ, १.१) |
| वायुपथाद् | वायु–पथ (५.१) |
| अहम् | मद् (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प | क्षि | भ्यां | च | म | या | गु | प्तो |
| ज | टा | यु | र्न | प्र | द | ह्य | त |
| प्र | मा | दा | त्त | त्र | नि | र्द | ग्धः |
| प | त | न्वा | यु | प | था | द | हम् |