इत्युक्त्वा तान्हरीन्सर्वान्संपातिः पततां वरः ।
उत्पपात गिरेः शृङ्गाज्जिज्ञासुः खगमो गतिम् ॥
इत्युक्त्वा तान्हरीन्सर्वान्संपातिः पततां वरः ।
उत्पपात गिरेः शृङ्गाज्जिज्ञासुः खगमो गतिम् ॥
अन्वयः
पतगोत्तमः foremost of birds, सम्पातिः Sampathi, सर्वान् all, सः those, हरीन् monkeys, इति in this way, उक्त्वा having said, खगमः the bird, गतिम् direction, जिज्ञासुः eager to find, गिरेः mountain's, शृङ्गात् from the peak, उत्पपात flew up.M N Dutt
Having said this to all the monkeys, that ranger of the sky and best of birds. Sampāti, anxious to ascertain his power of flight, flew up from the mountain summits.Summary
Sampati, the foremost of the birds thus spoke to the monkeys and flew up from the mountain's peak keen on finding the aerial path.पदच्छेदः
| इत्युक्त्वा | इति (अव्ययः)–उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| तान् | तद् (२.३) |
| हरीन् | हरि (२.३) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| संपातिः | सम्पाति (१.१) |
| पततां | पतत् (√पत् + शतृ, ६.३) |
| वरः | वर (१.१) |
| उत्पपात | उत्पपात (√उत्-पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| गिरेः | गिरि (६.१) |
| शृङ्गाज्जिज्ञासुः | शृङ्ग (५.१)–जिज्ञासु (१.१) |
| खगमो | खगम (१.१) |
| गतिम् | गति (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | त्यु | क्त्वा | ता | न्ह | री | न्स | र्वा |
| न्सं | पा | तिः | प | त | तां | व | रः |
| उ | त्प | पा | त | गि | रेः | शृ | ङ्गा |
| ज्जि | ज्ञा | सुः | ख | ग | मो | ग | तिम् |