कस्य प्रसादाद्दारांश्च पुत्रांश्चैव गृहाणि च ।
इतो निवृत्ताः पश्येम सिद्धार्थाः सुखिनो वयम् ॥
कस्य प्रसादाद्दारांश्च पुत्रांश्चैव गृहाणि च ।
इतो निवृत्ताः पश्येम सिद्धार्थाः सुखिनो वयम् ॥
अन्वयः
वयम् we,कस्य whose, प्रभावात् effort,सिद्धार्थाः emerge successful,सुखिनः happy,इतः from here, निवृत्ताः return,दारांश्च wives,पुत्रांश्चैव and sons, गृहाणि च and homes,पश्येम we will see.M N Dutt
By whose favour shall we, crowned with success and rendered happy, returning from this place, shall behold our wives and our son, and our homes?Summary
'By whose effort can we be successful and return home happily from here to meet wives and sons?पदच्छेदः
| कस्य | क (६.१) |
| प्रसादाद् | प्रसाद (५.१) |
| दारांश्च | दार (२.३)–च (अव्ययः) |
| पुत्रांश्चैव | पुत्र (२.३)–च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| गृहाणि | गृह (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| इतो | इतस् (अव्ययः) |
| निवृत्ताः | निवृत्त (√नि-वृत् + क्त, १.३) |
| पश्येम | पश्येम (√पश् विधिलिङ् उ.पु. द्वि.) |
| सिद्धार्थाः | सिद्धार्थ (१.३) |
| सुखिनो | सुखिन् (१.३) |
| वयम् | मद् (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | स्य | प्र | सा | दा | द्दा | रां | श्च |
| पु | त्रां | श्चै | व | गृ | हा | णि | च |
| इ | तो | नि | वृ | त्ताः | प | श्ये | म |
| सि | द्धा | र्थाः | सु | खि | नो | व | यम् |