महानुभावस्य वचो निशम्य; हरिर्नराणामृषभस्य तस्य ।
कृतं स मेने हरिवीर मुख्य;स्तदा स्वकार्यं हृदयेन विद्वान् ॥
महानुभावस्य वचो निशम्य; हरिर्नराणामृषभस्य तस्य ।
कृतं स मेने हरिवीर मुख्य;स्तदा स्वकार्यं हृदयेन विद्वान् ॥
अन्वयः
विद्वान् wise man, सः he, हरिवीरमुख्यः chief of monkeys, हरिः monkey, महानुभावस्य of the magnanimous, तस्य his, नृपाणाम् of kings, रुषभस्य of the bull among men, वचः words, निशम्य after listening, तदा then, कार्यम् task, कृतम् achieved, हृदयेन at heart, मेने he thoughtM N Dutt
Hearing the words of that illustrious monarch of kings, that hero-greatest of monkeys-considered and felt in his heart as if his work had already been accomplished.Summary
Wise Sugriva, chief of monkeys, heard the words of the magnanimous Rama, a bull among men. He felt glad at heart thinking that his task has been achieved.इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे सप्तमस्सर्गः॥Thus ends the seventh sarga of Kishkindakanda of the Holy Ramayana, the first epic composed by the sage Valmiki.पदच्छेदः
| महानुभावस्य | महत्–अनुभाव (६.१) |
| वचो | वचस् (२.१) |
| निशम्य | निशम्य (√नि-शामय् + ल्यप्) |
| हरिर् | हरि (१.१) |
| नराणाम् | नर (६.३) |
| ऋषभस्य | ऋषभ (६.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| कृतं | कृत (√कृ + क्त, २.१) |
| स | तद् (१.१) |
| मेने | मेने (√मन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| हरिवीरमुख्यस् | हरि–वीर–मुख्य (१.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| स्वकार्यं | स्व–कार्य (२.१) |
| हृदयेन | हृदय (३.१) |
| विद्वान् | विद्वस् (१.१) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | हा | नु | भा | व | स्य | व | चो | नि | श | म्य |
| ह | रि | र्न | रा | णा | मृ | ष | भ | स्य | त | स्य |
| कृ | तं | स | मे | ने | ह | रि | वी | र | मु | ख्य |
| स्त | दा | स्व | का | र्यं | हृ | द | ये | न | वि | द्वान् |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||