बाष्पमापतितं धैर्यान्निग्रहीतुं त्वमर्हसि ।
मर्यादां सत्त्वयुक्तानां धृतिं नोत्स्रष्टुमर्हसि ॥
बाष्पमापतितं धैर्यान्निग्रहीतुं त्वमर्हसि ।
मर्यादां सत्त्वयुक्तानां धृतिं नोत्स्रष्टुमर्हसि ॥
अन्वयः
त्वम् you, आपतितम् streaming down, बाष्पम् tears, धैर्यात् with patience, निग्रहीतुम् to restrain, अर्हसि you ought to, सत्त्वयुक्तानाम् men endowed with equilibrium, मर्यादाम् mark, धृतिम् steadfastness, उत्स्रष्टुम् to deviate from, नार्हसि ought notM N Dutt
It behoveth you to restrain your falling tears by patience. It behoveth you not to resign that patience which is the dignity of persons possessed of the quality of goodness.Summary
'Restrain the flow of your tears. Be patient. Men (like you) endowed with equilibrium and dignity and patience ought not to leave their composure.पदच्छेदः
| बाष्पम् | बाष्प (२.१) |
| आपतितं | आपतित (√आ-पत् + क्त, २.१) |
| धैर्यान् | धैर्य (५.१) |
| निग्रहीतुं | निग्रहीतुम् (√नि-ग्रह् + तुमुन्) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् लट् म.पु. ) |
| मर्यादां | मर्यादा (२.१) |
| सत्त्वयुक्तानां | सत्त्व–युक्त (√युज् + क्त, ६.३) |
| धृतिं | धृति (२.१) |
| नोत्स्रष्टुम् | न (अव्ययः)–उत्स्रष्टुम् (√उत्-सृज् + तुमुन्) |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् लट् म.पु. ) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बा | ष्प | मा | प | ति | तं | धै | र्या |
| न्नि | ग्र | ही | तुं | त्व | म | र्ह | सि |
| म | र्या | दां | स | त्त्व | यु | क्ता | नां |
| धृ | तिं | नो | त्स्र | ष्टु | म | र्ह | सि |