अन्वयः
सुरसया by Surasa, एवम् in that way, उक्तः having been spoken to, वानरपुङ्गवः supreme vanara, क्रुद्धः got angry, अब्रवीत् he said, वक्त्रम् mouth, कुरु वै open, येन in such a way, माम् me, विषहिष्यसे you can bear me.
Summary
Thus addressed by Surasa, Hanuman the supreme vanara said, "Open your mouth wide enough to hold me."
पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्तः | उक्त (√वच् + क्त, १.१) |
| सुरसया | सुरसा (३.१) |
| क्रुद्धो | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| वानरपुंगवः | वानर–पुंगव (१.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| कुरु | कुरु (√कृ लोट् म.पु. ) |
| वै | वै (अव्ययः) |
| वक्त्रं | वक्त्र (२.१) |
| येन | यद् (३.१) |
| मां | मद् (२.१) |
| विषहिष्यसे | विषहिष्यसे (√वि-सह् लृट् म.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | व | मु | क्तः | सु | र | स | या |
| क्रु | द्धो | वा | न | र | पुं | ग | वः |
| अ | ब्र | वी | त्कु | रु | वै | व | क्त्रं |
| ये | न | मां | वि | ष | हि | ष्य | से |