अन्वयः
तदा then, हनुमान् Hanuman, सुरसां Surasa, इति thus, उक्त्वा having said, क्रुद्धः angry, दशयोजनम् ten yojanas, आयतां wide, दशयोजनविस्तारः ten yojanas in breadth, बभूव became.
Summary
Provoked by the words of Surasa, Hanuman stretched himself to ten yojanas.
पदच्छेदः
| इत्युक्त्वा | इति (अव्ययः)–उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| सुरसां | सुरसा (२.१) |
| क्रुद्धो | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| दशयोजनम् | दशन्–योजन (२.१) |
| आयतः | आयत (√आ-यम् + क्त, १.१) |
| दशयोजनविस्तारो | दशन्–योजन–विस्तार (१.१) |
| बभूव | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.) |
| हनुमांस्तदा | हनुमन्त् (१.१)–तदा (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | त्यु | क्त्वा | सु | र | सां | क्रु | द्धो |
| द | श | यो | ज | न | मा | य | तः |
| द | श | यो | ज | न | वि | स्ता | रो |
| ब | भू | व | ह | नु | मां | स्त | दा |