अन्वयः
इति thus, मनसा in her mind, सञ्चिन्त्य after thinking, अस्य his, छायाम् shadow, समाक्षिपत् pulled, छायायाम् when his shadow, गृह्यमाणायाम् was held, वानरः vanara, चिन्तयामास deliberated.
Summary
Thinking thus, she dragged him by his shadow before she took hold of him, Hanuman started deliberating within.
पदच्छेदः
| इति | इति (अव्ययः) |
| संचिन्त्य | संचिन्त्य (√सम्-चिन्तय् + ल्यप्) |
| मनसा | मनस् (३.१) |
| छायाम् | छाया (२.१) |
| अस्य | इदम् (६.१) |
| समक्षिपत् | समक्षिपत् (√सम्-क्षिप् लङ् प्र.पु. एक.) |
| छायायां | छाया (७.१) |
| संगृहीतायां | संगृहीत (√सम्-ग्रह् + क्त, ७.१) |
| चिन्तयामास | चिन्तयामास (√चिन्तय् प्र.पु. एक.) |
| वानरः | वानर (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | ति | सं | चि | न्त्य | म | न | सा |
| छा | या | म | स्य | स | म | क्षि | पत् |
| छा | या | यां | सं | गृ | ही | ता | यां |
| चि | न्त | या | मा | स | वा | न | रः |