पदच्छेदः
| भिद्यते | भिद्यते (√भिद् प्र.पु. एक.) |
| ऽयं | इदम् (१.१) |
| गिरिर् | गिरि (१.१) |
| भूतैर् | भूत (३.३) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| मत्वा | मत्वा (√मन् + क्त्वा) |
| तपस्विनः | तपस्विन् (१.३) |
| त्रस्ता | त्रस्त (√त्रस् + क्त, १.३) |
| विद्याधरास्तस्माद् | विद्याधर (१.३)–तद् (५.१) |
| उत्पेतुः | उत्पेतुः (√उत्-पत् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| स्त्रीगणैः | स्त्री–गण (३.३) |
| सह | सह (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भि | द्य | ते | ऽयं | गि | रि | र्भू | तै |
| रि | ति | म | त्वा | त | प | स्वि | नः |
| त्र | स्ता | वि | द्या | ध | रा | स्त | स्मा |
| दु | त्पे | तुः | स्त्री | ग | णैः | स | ह |