सीतामदृष्ट्वा ह्यनवाप्य पौरुषं; विहृत्य कालं सह वानरैश्चिरम् ।
न मेऽस्ति सुग्रीवसमीपगा गतिः; सुतीक्ष्णदण्डो बलवांश्च वानरः ॥
सीतामदृष्ट्वा ह्यनवाप्य पौरुषं; विहृत्य कालं सह वानरैश्चिरम् ।
न मेऽस्ति सुग्रीवसमीपगा गतिः; सुतीक्ष्णदण्डो बलवांश्च वानरः ॥
अन्वयः
सीताम् Sita, अदृष्ट्वा without seeing, पौरुषम् pride of achievement, अनवाप्य without achieving, वानरैः सह accompanied by vanaras, चिरं कालम् for a long time, विहृत्य having passed time, मे to myself, सुग्रीवसमीपगा to approach Sugriva, गतिः way, नास्ति not possible, वानरः vanara, सुतीक्ष्णदण्डः will punish severely, बलवांश्च powerful.M N Dutt
Failing to see Sītā, and (thereby) annulling my prowess, and having long spent the appointed space in company with the monkeys, way have I none to present myself before Sugrīva, that monkey being puissant and given to meting out sharp chastisement.Summary
'I have spent a long time with vanaras. I have not succeded in my efforts to find Sita. I dare not see Sugriva now without finding Sita and without fulfilling my task. Sugriva will punish me severely. There is no way out.'पदच्छेदः
| सीताम् | सीता (२.१) |
| अदृष्ट्वा | अदृष्ट्वा (अव्ययः) |
| ह्यनवाप्य | हि (अव्ययः)–अनवाप्य (अव्ययः) |
| पौरुषं | पौरुष (२.१) |
| विहृत्य | विहृत्य (√वि-हृ + ल्यप्) |
| कालं | काल (२.१) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| वानरैश्चिरम् | वानर (३.३)–चिर (२.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| ऽस्ति | अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| सुग्रीवसमीपगा | सुग्रीव–समीप–ग (१.१) |
| गतिः | गति (१.१) |
| सुतीक्ष्णदण्डो | सु (अव्ययः)–तीक्ष्ण–दण्ड (१.१) |
| बलवांश्च | बलवत् (१.१)–च (अव्ययः) |
| वानरः | वानर (१.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सी | ता | म | दृ | ष्ट्वा | ह्य | न | वा | प्य | पौ | रु | षं |
| वि | हृ | त्य | का | लं | स | ह | वा | न | रै | श्चि | रम् |
| न | मे | ऽस्ति | सु | ग्री | व | स | मी | प | गा | ग | तिः |
| सु | ती | क्ष्ण | द | ण्डो | ब | ल | वां | श्च | वा | न | रः |
| ज | त | ज | र | ||||||||