अन्वयः
कृच्छ्रगतम् in painful state, पञ्चत्वगतमानसम् one who has almost given his life, तम् him, दृष्ट्वा seeing, भृशानुरक्तः deeply devoted, मेधावी wise, लक्ष्मणः Lakshmana, न भविष्यति will not survive.
M N Dutt
Seeing him come under misery, with his mind expiring, the intelligent Laksmana, firmly attached (to Rāma), shall also cease to exist.
Summary
"Seeing Rama in such a painful state, wise Lakshmana who has given his life to Rama, to whom he is deeply devoted will also not survive.
पदच्छेदः
| तं | तद् (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| कृच्छ्रगतं | कृच्छ्र–गत (√गम् + क्त, २.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| पञ्चत्वगतमानसम् | पञ्चत्व–गत (√गम् + क्त)–मानस (२.१) |
| भृशानुरक्तो | भृश–अनुरक्त (√अनु-रञ्ज् + क्त, १.१) |
| मेधावी | मेधाविन् (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| भविष्यति | भविष्यति (√भू लृट् प्र.पु. एक.) |
| लक्ष्मणः | लक्ष्मण (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तं | तु | कृ | च्छ्र | ग | तं | दृ | ष्ट्वा |
| प | ञ्च | त्व | ग | त | मा | न | सं |
| भृ | शा | नु | र | क्तो | मे | धा | वी |
| न | भ | वि | ष्य | ति | ल | क्ष्म | णः |