नमोऽस्तु रामाय सलक्ष्मणाय; देव्यै च तस्यै जनकात्मजायै ।
नमोऽस्तु रुद्रेन्द्रयमानिलेभ्यो; नमोऽस्तु चन्द्रार्कमरुद्गणेभ्यः ॥
नमोऽस्तु रामाय सलक्ष्मणाय; देव्यै च तस्यै जनकात्मजायै ।
नमोऽस्तु रुद्रेन्द्रयमानिलेभ्यो; नमोऽस्तु चन्द्रार्कमरुद्गणेभ्यः ॥
अन्वयः
सलक्ष्मणाय along with Lakshmana, रामाय to Rama, नमः salutations, अस्तु I offer, देव्यै to the divine lady, तस्यै to her, जनकात्मजायै च to Janaka's daughter, रुद्रेन्द्रयमानिलेभ्यः to Rudra, Indra, Yama and Vayu, नमः salutations, अस्तु be, चन्द्रार्कमरुद्गणेभ्यः Sun, Moon and Marutas, नमः salutations, अस्तु I offer.M N Dutt
Having thus reflected for a space, the mightyarmed offspring of the Wind-god, his senses agitated with anxiety, arose. “I bow to Rāma with Lakşmaņa, and to the revered daughter of Janaka, I bow to Rudra, and Indra, and Yama, and Wind-god, and I bow to the Moon, to Fire and to the Maruts."Summary
"My salutations to Lakshmana, Rama and divine daughter of Janaka. Salutations to Rudra, Indra, Yama and Vayu. Salutations to Sun, Moon and Maruts"पदच्छेदः
| नमो | नमस् (१.१) |
| ऽस्तु | अस्तु (√अस् लोट् प्र.पु. एक.) |
| रामाय | राम (४.१) |
| सलक्ष्मणाय | स (अव्ययः)–लक्ष्मण (४.१) |
| देव्यै | देवी (४.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| तस्यै | तद् (४.१) |
| जनकात्मजायै | जनकात्मजा (४.१) |
| नमो | नमस् (१.१) |
| ऽस्तु | अस्तु (√अस् लोट् प्र.पु. एक.) |
| रुद्रेन्द्रयमानिलेभ्यो | रुद्र–इन्द्र–यम–अनिल (४.३) |
| नमो | नमस् (१.१) |
| ऽस्तु | अस्तु (√अस् लोट् प्र.पु. एक.) |
| चन्द्रार्कमरुद्गणेभ्यः | चन्द्र–अर्क–मरुत्–गण (४.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | मो | ऽस्तु | रा | मा | य | स | ल | क्ष्म | णा | य |
| दे | व्यै | च | त | स्यै | ज | न | का | त्म | जा | यै |
| न | मो | ऽस्तु | रु | द्रे | न्द्र | य | मा | नि | ले | भ्यो |
| न | मो | ऽस्तु | च | न्द्रा | र्क | म | रु | द्ग | णे | भ्यः |