अन्वयः
धूमजालेन by a cloud of smoke, संसक्ताम् obscured, विभावसो of fire, शिखामिव like the flames of fire, सन्दिग्धाम् blurred, स्मृतीमिव like memory, निपतिताम् one who has fallen, ऋद्धिमिव like the fortune, ताम् her.
Summary
She was like the flames of fire obscured by smoke. She appeared like the text of Smriti of doubtful meaning, a treasure that has been thrown away
पदच्छेदः
| संसक्तां | संसक्त (√सम्-सञ्ज् + क्त, २.१) |
| धूमजालेन | धूम–जाल (३.१) |
| शिखाम् | शिखा (२.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| विभावसोः | विभावसु (६.१) |
| तां | तद् (२.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| संदिग्धाम् | संदिग्ध (√सम्-दिह् + क्त, २.१) |
| ऋद्धिं | ऋद्धि (२.१) |
| निपतिताम् | निपतित (√नि-पत् + क्त, २.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| सं | स | क्तां | धू | म | जा | ले | न |
| शि | खा | मि | व | वि | भा | व | सोः |
| तां | स्मृ | ती | मि | व | सं | दि | ग्धा |
| मृ | द्धिं | नि | प | ति | ता | मि | व |