अन्वयः
विशालाक्ष्याः largeeyed lady, अस्याः हेतोः on her account, मया by me, नदनदीपतिः lord of rivers and rivulets, सागरश्च ocean also, क्रान्तः crossed, इयम् this, पुरी च and city, अवेक्षिता surveyed.
M N Dutt
And it is for this (damsel) of expansive eyes that I have crossed the effulgent lord of rivers and have seen this city.
Summary
"On account of the largeeyed Sita I ventured to cross the lord of rivers, the sea, and came to this city.
पदच्छेदः
| सागरश्च | सागर (१.१)–च (अव्ययः) |
| मया | मद् (३.१) |
| क्रान्तः | क्रान्त (√क्रम् + क्त, १.१) |
| श्रीमान्नदनदीपतिः | श्रीमत् (१.१)–नद–नदीपति (१.१) |
| अस्या | इदम् (६.१) |
| हेतोर् | हेतु (५.१) |
| विशालाक्ष्याः | विशाल–अक्ष (६.१) |
| पुरी | पुरी (१.१) |
| चेयं | च (अव्ययः)–इदम् (१.१) |
| निरीक्षिता | निरीक्षित (√निः-ईक्ष् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| सा | ग | र | श्च | म | या | क्रा | न्तः |
| श्री | मा | न्न | द | न | दी | प | तिः |
| अ | स्या | हे | तो | र्वि | शा | ला | क्ष्याः |
| पु | री | चे | यं | नि | री | क्षि | ता |