प्रहर्षमतुलं लेभे मारुतिः प्रेक्ष्य मैथिलीम् ।
हर्षजानि च सोऽश्रूणि तां दृष्ट्वा मदिरेक्षणाम् ।
मुमोच हनुमांस्तत्र नमश्चक्रे च राघवम् ॥
प्रहर्षमतुलं लेभे मारुतिः प्रेक्ष्य मैथिलीम् ।
हर्षजानि च सोऽश्रूणि तां दृष्ट्वा मदिरेक्षणाम् ।
मुमोच हनुमांस्तत्र नमश्चक्रे च राघवम् ॥
अन्वयः
हनुमान् Hanuman, मदिरेक्षणाम् with eyes intoxicating, ताम् her, तत्र there, दृष्ट्वा seeing, हर्षजानि arising due to joy, अश्रूणि tears, मुमुचे shed, राघवम् to Rama, नमश्चक्रे च paid obeisance.M N Dutt
And beholding her having inebriate eyes, Hanumān shed tears of delight and bowed to Rāghava.Summary
Seeing that lady with eyes intoxicating, Hanuman shed tears of joy. At once he paid obeisance to Rama. (thinking he could trace Sita at last).पदच्छेदः
| प्रहर्षम् | प्रहर्ष (२.१) |
| अतुलं | अतुल (२.१) |
| लेभे | लेभे (√लभ् लिट् प्र.पु. एक.) |
| मारुतिः | मारुति (१.१) |
| प्रेक्ष्य | प्रेक्ष्य (√प्र-ईक्ष् + ल्यप्) |
| मैथिलीम् | मैथिली (२.१) |
| हर्षजानि | हर्ष–ज (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| सो | तद् (१.१) |
| ऽश्रूणि | अश्रु (२.३) |
| तां | तद् (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| मदिरेक्षणाम् | मदिरा–ईक्षण (२.१) |
| मुमोच | मुमोच (√मुच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| हनुमांस्तत्र | हनुमन्त् (१.१)–तत्र (अव्ययः) |
| नमश्चक्रे | नमस् (२.१)–चक्रे (√कृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| च | च (अव्ययः) |
| राघवम् | राघव (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | ह | र्ष | म | तु | लं | ले | भे | मा | रु | तिः | प्रे |
| क्ष्य | मै | थि | लीम् | ह | र्ष | जा | नि | च | सो | ऽश्रू | णि |
| तां | दृ | ष्ट्वा | म | दि | रे | क्ष | णाम् | मु | मो | च | ह |
| नु | मां | स्त | त्र | न | म | श्च | क्रे | च | रा | घ | वम् |