असंवृतायामासीनां धरण्यां संशितव्रताम् ।
छिन्नां प्रपतितां भूमौ शाखामिव वनस्पतेः ।
मलमण्डनदिग्धाङ्गीं मण्डनार्हाममण्डिताम् ॥
असंवृतायामासीनां धरण्यां संशितव्रताम् ।
छिन्नां प्रपतितां भूमौ शाखामिव वनस्पतेः ।
मलमण्डनदिग्धाङ्गीं मण्डनार्हाममण्डिताम् ॥
अन्वयः
असंवृताम् on a bare, धरण्याम् on the ground, आसीनाम् seated, संशितव्रताम् one who is woeful, छिन्नाम् broken, भूमौ on the ground, प्रपतिताम् fallen, वनस्पतेः of a tree, शाखामिव like a branch.Summary
She looked woeful seated on the bare earth like the broken branch of a tree cut and fallen down on the ground.पदच्छेदः
| असंवृतायाम् | असंवृत (७.१) |
| आसीनां | आसीन (√आस् + क्त, २.१) |
| धरण्यां | धरणी (७.१) |
| संशितव्रताम् | संशित–व्रत (२.१) |
| छिन्नां | छिन्न (√छिद् + क्त, २.१) |
| प्रपतितां | प्रपतित (√प्र-पत् + क्त, २.१) |
| भूमौ | भूमि (७.१) |
| शाखाम् | शाखा (२.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| वनस्पतेः | वनस्पति (६.१) |
| मलमण्डनदिग्धाङ्गीं | मल–मण्डन–दिग्ध (√दिह् + क्त)–अङ्ग (२.१) |
| मण्डनार्हाम् | मण्डन–अर्ह (२.१) |
| अमण्डिताम् | अमण्डित (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | सं | वृ | ता | या | मा | सी | नां | ध | र | ण्यां | सं |
| शि | त | व्र | ताम् | छि | न्नां | प्र | प | ति | तां | भू | मौ |
| शा | खा | मि | व | व | न | स्प | तेः | म | ल | म | ण्ड |
| न | दि | ग्धा | ङ्गीं | म | ण्ड | ना | र्हा | म | म | ण्डि | ताम् |