तां तर्ज्यमानां संप्रेक्ष्य राक्षसेन्द्रेण जानकीम् ।
देवगन्धर्वकन्यास्ता विषेदुर्विपुलेक्षणाः ॥
तां तर्ज्यमानां संप्रेक्ष्य राक्षसेन्द्रेण जानकीम् ।
देवगन्धर्वकन्यास्ता विषेदुर्विपुलेक्षणाः ॥
अन्वयः
राक्षसेन्द्रेण by the demon king, तर्ज्यमानाम् threatened, तां जानकीम् that Janaki, सम्प्रेक्ष्य observing, ताः those, देवगन्धर्वकन्याः daughters of gods and gandharvas, विकृतेक्षणाः distressed eyes, विषेदुः wept sadly.M N Dutt
Beholding the lord of Rākşasas remonstrate with the daughter of Janaka is this wise, the daughters of the celestials and Gandharvas became exceedingly sorry.Summary
Observing Janaki, threatened by the demon king the daughters of gods and gandharvas shed tears with distressful eyes.पदच्छेदः
| तां | तद् (२.१) |
| तर्ज्यमानां | तर्ज्यमान (√तर्ज् + शानच्, २.१) |
| सम्प्रेक्ष्य | सम्प्रेक्ष्य (√सम्प्र-ईक्ष् + ल्यप्) |
| राक्षसेन्द्रेण | राक्षस–इन्द्र (३.१) |
| जानकीम् | जानकी (२.१) |
| देवगन्धर्वकन्यास्ता | देव–गन्धर्व–कन्या (१.३)–तद् (१.३) |
| विषेदुर् | विषेदुः (√वि-सद् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| विपुलेक्षणाः | विपुल–ईक्षण (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तां | त | र्ज्य | मा | नां | सं | प्रे | क्ष्य |
| रा | क्ष | से | न्द्रे | ण | जा | न | कीम् |
| दे | व | ग | न्ध | र्व | क | न्या | स्ता |
| वि | षे | दु | र्वि | पु | ले | क्ष | णाः |