मया क्रीड महाराजसीतया किं तवानया ।
अकामां कामयानस्य शरीरमुपतप्यते ।
इच्छन्तीं कामयानस्य प्रीतिर्भवति शोभना ॥
मया क्रीड महाराजसीतया किं तवानया ।
अकामां कामयानस्य शरीरमुपतप्यते ।
इच्छन्तीं कामयानस्य प्रीतिर्भवति शोभना ॥
अन्वयः
अकामाम् a woman devoid of desire, कामयानस्य of a man who desires, शरीरम् body, उपतप्यते only is tormented, इच्छन्तीम् a lady who desires, कामयानस्य one who is desiring, शोभना is enjoyable, प्रीतिः pleasure भवति becomesM N Dutt
Again he who desire for an unwilling dame burn his own person—and he who desire for a willing damsel, attain excess of delight.पदच्छेदः
| मया | मद् (३.१) |
| क्रीड | क्रीड (√क्रीड् लोट् म.पु. ) |
| महाराजसीतया | महत्–राज (८.१)–सीता (३.१) |
| किं | क (१.१) |
| तवानया | त्वद् (६.१)–इदम् (३.१) |
| अकामां | अकाम (२.१) |
| कामयानस्य | कामयान (√कामय् + शानच्, ६.१) |
| शरीरम् | शरीर (१.१) |
| उपतप्यते | उपतप्यते (√उप-तप् प्र.पु. एक.) |
| इच्छन्तीं | इच्छत् (√इष् + शतृ, २.१) |
| कामयानस्य | कामयान (√कामय् + शानच्, ६.१) |
| प्रीतिर् | प्रीति (१.१) |
| भवति | भवति (√भू लट् प्र.पु. एक.) |
| शोभना | शोभन (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | या | क्री | ड | म | हा | रा | ज | सी | त | या | किं |
| त | वा | न | या | अ | का | मां | का | म | या | न | स्य |
| श | री | र | मु | प | त | प्य | ते | इ | च्छ | न्तीं | का |
| म | या | न | स्य | प्री | ति | र्भ | व | ति | शो | भ | ना |