तस्य पुत्रो विशालाक्षि रावणः शत्रुरावणः ।
तस्य त्वं राक्षसेन्द्रस्य भार्या भवितुमर्हसि ।
मयोक्तं चारुसर्वाङ्गि वाक्यं किं नानुमन्यसे ॥
तस्य पुत्रो विशालाक्षि रावणः शत्रुरावणः ।
तस्य त्वं राक्षसेन्द्रस्य भार्या भवितुमर्हसि ।
मयोक्तं चारुसर्वाङ्गि वाक्यं किं नानुमन्यसे ॥
अन्वयः
विशालाक्षि a largeeyed lady, शत्रुरावण: a tormentor of enemies, रावणः Ravana, तस्य his, पुत्रः son, त्वम् you, राक्षसेन्द्रस्य lord of demons, तस्य his, भार्या wife, भवितुम् to become, अर्हसि you deserve, चारुसर्वाङ्गि a lady of beautiful limbs, मया by me, उक्तम् spoken, वाक्यम् words, किम् why, नानुमन्यसे not heeding.M N Dutt
O large-eyed damsel! Of Visravā came Rāvana terrible to his enemies. And it behove you to become the consort of that lord of Raksasas. Scorn not the words I say to you, O you of comely presence.”Summary
'O largeeyes lady to become the wife of the lord of demons is a stroke of good luck. You deserve to be one. O lady of beautiful limbs why don't you accept his proposal?'पदच्छेदः
| तस्य | तद् (६.१) |
| पुत्रो | पुत्र (१.१) |
| विशालाक्षि | विशाल–अक्ष (८.१) |
| रावणः | रावण (१.१) |
| शत्रुरावणः | शत्रु–रावण (१.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| राक्षसेन्द्रस्य | राक्षस–इन्द्र (६.१) |
| भार्या | भार्या (१.१) |
| भवितुम् | भवितुम् (√भू + तुमुन्) |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् लट् म.पु. ) |
| मयोक्तं | मद् (३.१)–उक्त (√वच् + क्त, २.१) |
| चारुसर्वाङ्गि | चारु–सर्व–अङ्ग (८.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| किं | क (२.१) |
| नानुमन्यसे | न (अव्ययः)–अनुमन्यसे (√अनु-मन् लट् म.पु. ) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्य | पु | त्रो | वि | शा | ला | क्षि | रा | व | णः | श |
| त्रु | रा | व | णः | त | स्य | त्वं | रा | क्ष | से | न्द्र | स्य |
| भा | र्या | भ | वि | तु | म | र्ह | सि | म | यो | क्तं | चा |
| रु | स | र्वा | ङ्गि | वा | क्यं | किं | ना | नु | म | न्य | से |