अन्वयः
निशाचरम् nightranger, विगर्हितम् vile, रावणम् Ravana, अहम् I, सव्येन with the left, चरेणेन अपि even with feet, न स्पृशेयम् will not touch, किं what, पुनः again, काममेयं can I love him.
M N Dutt
What of fixing my fancy on that night-ranger Rāvaņa, my meaner foot even shall not touch him?
Summary
"I will not even touch that vile nightranger Ravana with my left foot. What to speak of loving him.
पदच्छेदः
| चरणेनापि | चरण (३.१)–अपि (अव्ययः) |
| सव्येन | सव्य (३.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| स्पृशेयं | स्पृशेयम् (√स्पृश् विधिलिङ् उ.पु. ) |
| निशाचरम् | निशाचर (२.१) |
| रावणं | रावण (२.१) |
| किं | किम् (अव्ययः) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| अहं | मद् (१.१) |
| कामयेयं | कामयेयम् (√कामय् विधिलिङ् उ.पु. ) |
| विगर्हितम् | विगर्हित (√वि-गर्ह् + क्त, २.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| च | र | णे | ना | पि | स | व्ये | न |
| न | स्पृ | शे | यं | नि | शा | च | रम् |
| रा | व | णं | किं | पु | न | र | हं |
| का | म | ये | यं | वि | ग | र्हि | तम् |