यस्या ह्येवं विधः स्वप्नो दुःखितायाः प्रदृश्यते ।
सा दुःखैर्बहुभिर्मुक्ता प्रियं प्राप्नोत्यनुत्तमम् ॥
यस्या ह्येवं विधः स्वप्नो दुःखितायाः प्रदृश्यते ।
सा दुःखैर्बहुभिर्मुक्ता प्रियं प्राप्नोत्यनुत्तमम् ॥
अन्वयः
यस्याम् when any woman, दुःखितायाम् when she is sorrowful, एवंविधः this kind of, स्वप्नः dream, प्रदृश्यते is seen, सा she, विविधैः with all kinds of, दुःखैः sorrows, मुक्ता she is relieved, अनुत्तमम् supreme, प्रियम् joy, प्राप्नोति will attain.M N Dutt
Surely shall she, divested of misfortune, he reconciled to her beloved and excellent husband, regarding whom, in her misery, I have dreamt such a dream.Summary
"When any demoness in a sorrowful state dreams this kind of dream, she will be relieved of sorrow and will obtain supreme joy.पदच्छेदः
| यस्या | यद् (६.१) |
| ह्येवंविधः | हि (अव्ययः)–एवंविध (१.१) |
| स्वप्नो | स्वप्न (१.१) |
| दुःखितायाः | दुःखित (६.१) |
| प्रदृश्यते | प्रदृश्यते (√प्र-दृश् प्र.पु. एक.) |
| सा | तद् (१.१) |
| दुःखैर् | दुःख (३.३) |
| बहुभिर् | बहु (३.३) |
| मुक्ता | मुक्त (√मुच् + क्त, १.१) |
| प्रियं | प्रिय (२.१) |
| प्राप्नोत्यनुत्तमम् | प्राप्नोति (√प्र-आप् लट् प्र.पु. एक.)–अनुत्तम (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | स्या | ह्ये | वं | वि | धः | स्व | प्नो |
| दुः | खि | ता | याः | प्र | दृ | श्य | ते |
| सा | दुः | खै | र्ब | हु | भि | र्मु | क्ता |
| प्रि | यं | प्रा | प्नो | त्य | नु | त्त | मम् |