तरस्विनौ धारयता मृगस्य; सत्त्वेन रूपं मनुजेन्द्रपुत्रौ ।
नूनं विशस्तौ मम कारणात्तौ; सिंहर्षभौ द्वाविव वैद्युतेन ॥
तरस्विनौ धारयता मृगस्य; सत्त्वेन रूपं मनुजेन्द्रपुत्रौ ।
नूनं विशस्तौ मम कारणात्तौ; सिंहर्षभौ द्वाविव वैद्युतेन ॥
अन्वयः
मृगस्य deer's, रूपम् form, धारयता by taking, सत्त्वेन by a creature, तरस्विनौ these pair of , तौ two, मनुजेन्द्रपुत्रौ princes, वैद्युतेन by bolt of lightning, द्वौ two, सिंहर्षभौ इव two mighty lions, मम कारणात् on my account, नूनम् verily, विशस्तौ are slain.M N Dutt
Verily for me, those two powerful, lion-like sons of the king, have been killed by (this demon) effulgent like the lightning and assuming the semblance of a deer.Summary
"Just like two mighty lions are killed by a bolt of lightning, the two princes must have been killed by a creature in the guise of a deer on my account.पदच्छेदः
| तरस्विनौ | तरस्विन् (१.२) |
| धारयता | धारयत् (√धारय् + शतृ, ३.१) |
| मृगस्य | मृग (६.१) |
| सत्त्वेन | सत्त्व (३.१) |
| रूपं | रूप (२.१) |
| मनुजेन्द्रपुत्रौ | मनुज–इन्द्र–पुत्र (१.२) |
| नूनं | नूनम् (अव्ययः) |
| विशस्तौ | विशस्त (√वि-शंस् + क्त, १.२) |
| मम | मद् (६.१) |
| कारणात् | कारण (५.१) |
| तौ | तद् (१.२) |
| सिंहर्षभौ | सिंह–ऋषभ (१.२) |
| द्वाविव | द्वि (१.२)–इव (अव्ययः) |
| वैद्युतेन | वैद्युत (३.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | र | स्वि | नौ | धा | र | य | ता | मृ | ग | स्य |
| स | त्त्वे | न | रू | पं | म | नु | जे | न्द्र | पु | त्रौ |
| नू | नं | वि | श | स्तौ | म | म | का | र | णा | त्तौ |
| सिं | ह | र्ष | भौ | द्वा | वि | व | वै | द्यु | ते | न |