गजेन्द्रहस्तप्रतिमश्च पीन;स्तयोर्द्वयोः संहतयोः सुजातः ।
प्रस्पन्दमानः पुनरूरुरस्या; रामं पुरस्तात्स्थितमाचचक्षे ॥
गजेन्द्रहस्तप्रतिमश्च पीन;स्तयोर्द्वयोः संहतयोः सुजातः ।
प्रस्पन्दमानः पुनरूरुरस्या; रामं पुरस्तात्स्थितमाचचक्षे ॥
अन्वयः
संहतयोः close to each other, तयोः द्वयोः of those two, गजेन्द्रहस्तप्रतिमः resembling an elephant's trunk, पीनः stout, सुजातः well shaped, अस्याः ऊरुः her thigh, प्रस्पन्दमानः throbbing, रामम् Rama, पुरस्तात् in front, स्थितम् stood, आचचक्षे indicated.M N Dutt
And her well built plump left thigh, resembling the trunk of an elephant, dancing, announced that she would soon behold Rāma.Summary
Again her roundshaped left thigh resembling an elephant's trunk started throbbing, presaging union with Rama.पदच्छेदः
| गजेन्द्रहस्तप्रतिमश्च | गज–इन्द्र–हस्त–प्रतिमा (१.१)–च (अव्ययः) |
| पीनस् | पीन (१.१) |
| तयोर् | तद् (६.२) |
| द्वयोः | द्वि (६.२) |
| संहतयोः | संहत (√सम्-हन् + क्त, ६.२) |
| सुजातः | सुजात (१.१) |
| प्रस्पन्दमानः | प्रस्पन्दमान (√प्र-स्पन्द् + शानच्, १.१) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| ऊरुर् | ऊरु (१.१) |
| अस्या | इदम् (६.१) |
| रामं | राम (२.१) |
| पुरस्तात् | पुरस्तात् (अव्ययः) |
| स्थितम् | स्थित (√स्था + क्त, २.१) |
| आचचक्षे | आचचक्षे (√आ-चक्ष् लिट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग | जे | न्द्र | ह | स्त | प्र | ति | म | श्च | पी | न |
| स्त | यो | र्द्व | योः | सं | ह | त | योः | सु | जा | तः |
| प्र | स्प | न्द | मा | नः | पु | न | रू | रु | र | स्या |
| रा | मं | पु | र | स्ता | त्स्थि | त | मा | च | च | क्षे |