अन्वयः
असौ he, वानरपुङ्गवः chief of the vanaras, एवम् in that way, वाचम् word, उक्त्वा having spoken, विरराम stopped, जानकी चापि even Janaki, तत् that, श्रुत्वा having heard, परम् great, विस्मयम् wonder, आगता felt.
Summary
Having spoken thus, the great vanara stopped speaking after that. Janaki was wonderstruck by the words of the vanara.
पदच्छेदः
| विररामैवम् | विरराम (√वि-रम् लिट् प्र.पु. एक.)–एवम् (अव्ययः) |
| उक्त्वासौ | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा)–अदस् (१.१) |
| वाचं | वाच् (२.१) |
| वानरपुंगवः | वानर–पुंगव (१.१) |
| जानकी | जानकी (१.१) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| तच्छ्रुत्वा | तद् (२.१)–श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| विस्मयं | विस्मय (२.१) |
| परमं | परम (२.१) |
| गता | गत (√गम् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वि | र | रा | मै | व | मु | क्त्वा | सौ |
| वा | चं | वा | न | र | पुं | ग | वः |
| जा | न | की | चा | पि | त | च्छ्रु | त्वा |
| वि | स्म | यं | प | र | मं | ग | ता |