सा तिर्यगूर्ध्वं च तथाप्यधस्ता;न्निरीक्षमाणा तमचिन्त्य बुद्धिम् ।
ददर्श पिङ्गाधिपतेरमात्यं; वातात्मजं सूर्यमिवोदयस्थम् ॥
सा तिर्यगूर्ध्वं च तथाप्यधस्ता;न्निरीक्षमाणा तमचिन्त्य बुद्धिम् ।
ददर्श पिङ्गाधिपतेरमात्यं; वातात्मजं सूर्यमिवोदयस्थम् ॥
अन्वयः
सा she, तिर्यक् obliquely, ऊर्ध्वं च vertically, तथापि so also, अथस्तात् downward, निरीक्षमाणा observing, अचिन्त्यबुद्धिम् of unimaginable intelligence, पिङ्गाधिपतेः of king of monkeys, अमात्यम् minister, उदयस्थम् rising, सूर्यमिव like Sun, तं वातात्मजम् that son of the Windgod, ददर्श saw.M N Dutt
And looking around her and upwards, she beheld, like to the rising sun, the Wind god's son, gifted with inconceivable intellect, the minister of the king of monkeys.Summary
She looked obliquely, up, and down and saw Hanuman of unimaginable intelligence, the minister of the monkey lord, son of the Windgod, who looked like the rising Sun.इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे एकत्रिंशस्सर्गः॥Thus ends the thirtyfirst sarga of Sundarakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| सा | तद् (१.१) |
| तिर्यग् | तिर्यञ्च् (२.१) |
| ऊर्ध्वं | ऊर्ध्वम् (अव्ययः) |
| च | च (अव्ययः) |
| तथाप्यधस्तान् | तथा (अव्ययः)–अपि (अव्ययः)–अधस्तात् (अव्ययः) |
| निरीक्षमाणा | निरीक्षमाण (√निः-ईक्ष् + शानच्, १.१) |
| तम् | तद् (२.१) |
| अचिन्त्यबुद्धिम् | अचिन्त्य–बुद्धि (२.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| पिङ्गाधिपतेर् | पिङ्ग–अधिपति (६.१) |
| अमात्यं | अमात्य (२.१) |
| वातात्मजं | वातात्मज (२.१) |
| सूर्यम् | सूर्य (२.१) |
| इवोदयस्थम् | इव (अव्ययः)–उदय–स्थ (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | ति | र्य | गू | र्ध्वं | च | त | था | प्य | ध | स्ता |
| न्नि | री | क्ष | मा | णा | त | म | चि | न्त्य | बु | द्धिम् |
| द | द | र्श | पि | ङ्गा | धि | प | ते | र | मा | त्यं |
| वा | ता | त्म | जं | सू | र्य | मि | वो | द | य | स्थम् |