अन्वयः
तत्र there, रक्षोगृहेषु in the demons' houses, जपताम् of those chanting, मन्त्रान् sacred (verses) words, शुश्राव heard, सः he, स्वाध्यायनिरतान् of those engaged in the study of Vedas continuously, यातुधानान् of demons, ददर्श saw, रावणस्तवसंयुक्तान् those engaged in the eulogy of Ravana, गर्जतः of those shouting, राक्षसानपि even the demons, ददर्श saw.
Summary
He heard chantings of sacred verses in the houses of demons engaged in the study of the vedas. And heard demons singing loudly the eulogy of Ravana.
पदच्छेदः
| स्वाध्यायनिरतांश्चैव | स्वाध्याय–निरत (√नि-रम् + क्त, २.३)–च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| यातुधानान् | यातुधान (२.३) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सः | तद् (१.१) |
| रावणस्तवसंयुक्तान् | रावण–स्तव–संयुक्त (√सम्-युज् + क्त, २.३) |
| गर्जतो | गर्जत् (√गर्ज् + शतृ, २.३) |
| राक्षसान् | राक्षस (२.३) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स्वा | ध्या | य | नि | र | तां | श्चै | व |
| या | तु | धा | ना | न्द | द | र्श | सः |
| रा | व | ण | स्त | व | सं | यु | क्ता |
| न्ग | र्ज | तो | रा | क्ष | सा | न | पि |