पदच्छेदः
| सुपुष्टबलसंगुप्तां | सु (अव्ययः)–पुष्ट (√पुष् + क्त)–बल–संगुप्त (√सम्-गुप् + क्त, २.१) |
| यथैव | यथा (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| विटपावतीम् | विटपावत् (२.१) |
| चारुतोरणनिर्यूहां | चारु–तोरण–निर्यूह (२.१) |
| पाण्डुरद्वारतोरणाम् | पाण्डुर–द्वार–तोरण (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | पु | ष्ट | ब | ल | सं | गु | प्तां |
| य | थै | व | वि | ट | पा | व | तीम् |
| चा | रु | तो | र | ण | नि | र्यू | हां |
| पा | ण्डु | र | द्वा | र | तो | र | णाम् |