स्वप्नोऽपि नायं न हि मेऽस्ति निद्रा; शोकेन दुःखेन च पीडितायाः ।
सुखं हि मे नास्ति यतोऽस्मि हीना; तेनेन्दुपूर्णप्रतिमाननेन ॥
स्वप्नोऽपि नायं न हि मेऽस्ति निद्रा; शोकेन दुःखेन च पीडितायाः ।
सुखं हि मे नास्ति यतोऽस्मि हीना; तेनेन्दुपूर्णप्रतिमाननेन ॥
अन्वयः
अयम् this, स्वप्नोऽपि even in a dream, न not, शोकेन with grief, दुःखेन च and with sorrow, पीडितायाः a tormented woman, मे to me, निद्रा sleep, नास्ति हि not there, मे to me, सुखम् pleasure, नास्ति हि not there, यतः therefore, इन्दुपूर्णप्रतिमाननेन whose face is like a fullmoon, तेन with him, हीना devoid, अस्मि I amM N Dutt
It is not dream, I have not slept, worn with grief and trouble as I am. Apart form my lord having the countenance of the full-moon, I have no happiness.Summary
"But no, it was not a dream for tormented by grief and sorrow I cannot have a dream. When separated from the moonfaced Rama I have no sleep or pleasure, how can I have dream?पदच्छेदः
| स्वप्नो | स्वप्न (१.१) |
| ऽपि | अपि (अव्ययः) |
| नायं | न (अव्ययः)–इदम् (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| ऽस्ति | अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| निद्रा | निद्रा (१.१) |
| शोकेन | शोक (३.१) |
| दुःखेन | दुःख (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| पीडितायाः | पीडित (√पीडय् + क्त, ६.१) |
| सुखं | सुख (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| नास्ति | न (अव्ययः)–अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| यतो | यतस् (अव्ययः) |
| ऽस्मि | अस्मि (√अस् लट् उ.पु. ) |
| हीना | हीन (√हा + क्त, १.१) |
| तेनेन्दुपूर्णप्रतिमाननेन | तद् (३.१)–इन्दु–पूर्ण–प्रतिमा–आनन (३.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्व | प्नो | ऽपि | ना | यं | न | हि | मे | ऽस्ति | नि | द्रा |
| शो | के | न | दुः | खे | न | च | पी | डि | ता | याः |
| सु | खं | हि | मे | ना | स्ति | य | तो | ऽस्मि | ही | ना |
| ते | ने | न्दु | पू | र्ण | प्र | ति | मा | न | ने | न |