मनोरथः स्यादिति चिन्तयामि; तथापि बुद्ध्या च वितर्कयामि ।
किं कारणं तस्य हि नास्ति रूपं; सुव्यक्तरूपश्च वदत्ययं माम् ॥
मनोरथः स्यादिति चिन्तयामि; तथापि बुद्ध्या च वितर्कयामि ।
किं कारणं तस्य हि नास्ति रूपं; सुव्यक्तरूपश्च वदत्ययं माम् ॥
अन्वयः
मनोरथः desire, स्यात् may be, इति thus, चिन्तयामि I think, बुद्ध्या च thinking, तथा like that, वितर्कयामि I am deliberating, तस्य its, रूपम् form, नास्ति हि is not seen, अयम् this, सुव्यक्तरूपः seen in a manifested form, माम् by me, वदति speaks, कारणम् cause, किम् what?M N Dutt
Methinks this is but a phantom of the mind. And thinking this I still behold the same. But an imaginary object can never have a form. And I still find a distinct form addressing me.Summary
"I feel it is only the desire in my mind. Desire has no form. But the one who is addressing me has a form. I cannot understand this.पदच्छेदः
| मनोरथः | मनोरथ (१.१) |
| स्याद् | स्यात् (√अस् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| चिन्तयामि | चिन्तयामि (√चिन्तय् लट् उ.पु. ) |
| तथापि | तथा (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| बुद्ध्या | बुद्धि (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| वितर्कयामि | वितर्कयामि (√वि-तर्कय् लट् उ.पु. ) |
| किं | क (१.१) |
| कारणं | कारण (१.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| नास्ति | न (अव्ययः)–अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| रूपं | रूप (१.१) |
| सुव्यक्तरूपश्च | सु (अव्ययः)–व्यक्त–रूप (१.१)–च (अव्ययः) |
| वदत्ययं | वदति (√वद् लट् प्र.पु. एक.)–इदम् (१.१) |
| माम् | मद् (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | नो | र | थः | स्या | दि | ति | चि | न्त | या | मि |
| त | था | पि | बु | द्ध्या | च | वि | त | र्क | या | मि |
| किं | का | र | णं | त | स्य | हि | ना | स्ति | रू | पं |
| सु | व्य | क्त | रू | प | श्च | व | द | त्य | यं | माम् |