नाहं स्वप्नमिमं मन्ये स्वप्ने दृष्ट्वा हि वानरम् ।
न शक्योऽभ्युदयः प्राप्तुं प्राप्तश्चाभ्युदयो मम ॥
नाहं स्वप्नमिमं मन्ये स्वप्ने दृष्ट्वा हि वानरम् ।
न शक्योऽभ्युदयः प्राप्तुं प्राप्तश्चाभ्युदयो मम ॥
अन्वयः
अहम् I am, इमम् this, स्वप्नम् dream, न मन्ये I do not think so, स्वप्ने in a dream, वानरम् vanara, दृष्ट्वा having seen, अभ्युदयः welfare, प्राप्तुम् to attain, न शक्यः not possible, मम to me, अभ्युदयः pleasure, प्राप्तश्च is experienced.M N Dutt
Nor do I regard this as dream. To behold a monkey in a dream dose not lead to prosperity whereas I have attained it. (Here prosperity means joy-Sītā attained an immense treasure of joy on beholding Rāma's messengerHanumãn.)Summary
"I do not think it is a dream. Pleasure cannot be experienced by seeing a vanara in a dream. I experience pleasure now (seeing a monkey in a dream is a bad omen).पदच्छेदः
| नाहं | न (अव्ययः)–मद् (१.१) |
| स्वप्नम् | स्वप्न (२.१) |
| इमं | इदम् (२.१) |
| मन्ये | मन्ये (√मन् लट् उ.पु. ) |
| स्वप्ने | स्वप्न (७.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| वानरम् | वानर (२.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| शक्यो | शक्य (१.१) |
| ऽभ्युदयः | अभ्युदय (१.१) |
| प्राप्तुं | प्राप्तुम् (√प्र-आप् + तुमुन्) |
| प्राप्तश्चाभ्युदयो | प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, १.१)–च (अव्ययः)–अभ्युदय (१.१) |
| मम | मद् (६.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ना | हं | स्व | प्न | मि | मं | म | न्ये |
| स्व | प्ने | दृ | ष्ट्वा | हि | वा | न | रम् |
| न | श | क्यो | ऽभ्यु | द | यः | प्रा | प्तुं |
| प्रा | प्त | श्चा | भ्यु | द | यो | म | म |