अन्वयः
मानार्हः respectable, राघवः Rama, मन्निमित्तेन on my account, शोकेन because of sorrow, कच्चित् I hope, रामः Rama, नअन्यमनाः he is not absent minded, न कच्चित् may be, माम् me, कच्चित् तारयिष्यति will he save me?
M N Dutt
Is not Rāghava, worthy of honours, beside himself with grief in my absence? Will not Rāma rescue me?
Summary
"I hope respectable Rama is not too absentminded for being immersed in sorrow on my account. Hope he will save me.
पदच्छेदः
| मन्निमित्तेन | मद्–निमित्त (३.१) |
| मानार्हः | मान–अर्ह (१.१) |
| कच्चिच्छोकेन | कश्चित् (२.१)–शोक (३.१) |
| राघवः | राघव (१.१) |
| कच्चिन्नान्यमना | कश्चित् (१.१)–न (अव्ययः)–अन्य–मनस् (१.१) |
| रामः | राम (१.१) |
| कच्चिन्मां | कश्चित् (२.१)–मद् (२.१) |
| तारयिष्यति | तारयिष्यति (√तारय् लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| म | न्नि | मि | त्ते | न | मा | ना | र्हः |
| क | च्चि | च्छो | के | न | रा | घ | वः |
| क | च्चि | न्ना | न्य | म | ना | रा | मः |
| क | च्चि | न्मां | ता | र | यि | ष्य | ति |