कच्चिन्न तद्धेमसमानवर्णं; तस्याननं पद्मसमानगन्धि ।
मया विना शुष्यति शोकदीनं; जलक्षये पद्ममिवातपेन ॥
कच्चिन्न तद्धेमसमानवर्णं; तस्याननं पद्मसमानगन्धि ।
मया विना शुष्यति शोकदीनं; जलक्षये पद्ममिवातपेन ॥
अन्वयः
तस्य his, हेमसमानवर्णम् complexion like gold, पद्मसमानगन्धि fragrance like lotus, तत् that, आननम् face, मया विना without me, शोकदीनम् pale with grief, जलक्षये when water dries up, आतपेन due to heat, पद्ममिव like a lotus, न शुष्यति कच्चित् not scorchedM N Dutt
Is not the gold-hued and lotus-smelling countenance (of Rāma) dried up my absence like to lotus dried up by the rays of the sun in shallow water?Summary
"Hope, Rama's moonlike face without me with its golden complexion and lotus fragrance must not have been pale and withered with tears like the lotus in a pond scorched by the heat.पदच्छेदः
| कच्चिन्न | कश्चित् (२.१)–न (अव्ययः) |
| तद्धेमसमानवर्णं | तद् (१.१)–हेमन्–समान–वर्ण (१.१) |
| तस्याननं | तद् (६.१)–आनन (१.१) |
| पद्मसमानगन्धि | पद्म–समान–गन्धि (१.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| विना | विना (अव्ययः) |
| शुष्यति | शुष्यति (√शुष् लट् प्र.पु. एक.) |
| शोकदीनं | शोक–दीन (१.१) |
| जलक्षये | जल–क्षय (७.१) |
| पद्मम् | पद्म (१.१) |
| इवातपेन | इव (अव्ययः)–आतप (३.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | च्चि | न्न | त | द्धे | म | स | मा | न | व | र्णं |
| त | स्या | न | नं | प | द्म | स | मा | न | ग | न्धि |
| म | या | वि | ना | शु | ष्य | ति | शो | क | दी | नं |
| ज | ल | क्ष | ये | प | द्म | मि | वा | त | पे | न |