आशीविष इव क्रुद्धः श्वसान्वाक्यमभाषथाः ।
केन ते नागनासोरु विक्षतं वै स्तनान्तरम् ।
कः क्रीडति सरोषेण पञ्चवक्त्रेण भोगिना ॥
आशीविष इव क्रुद्धः श्वसान्वाक्यमभाषथाः ।
केन ते नागनासोरु विक्षतं वै स्तनान्तरम् ।
कः क्रीडति सरोषेण पञ्चवक्त्रेण भोगिना ॥
अन्वयः
भीरु timid, ते you, स्तनान्तरम् from the breasts, केन who, नखाग्रैः with the tip of the nails, दारितम् scratched, सरोषेण furious, पञ्चवक्त्रेण भोगिना fivehooded serpent, कः who, क्रीडति sported.M N Dutt
O you having thighs like the trunk of an elephant, by whom has your breast been wounded? Who wants to play with an angry five-hooded serpent?Summary
'O Sita with a beautiful lap like an elephant trunk by whom is your bosom wounded? Who is sporting with an angry fivehooded snake?पदच्छेदः
| आशीविष | आशीविष (१.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| क्रुद्धः | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| श्वसन् | श्वसत् (√श्वस् + शतृ, १.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अभाषथाः | अभाषथाः (√भाष् लङ् म.पु. ) |
| केन | क (३.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| नागनासोरु | नाग–नासा–ऊरु (८.१) |
| विक्षतं | विक्षत (√वि-क्षन् + क्त, १.१) |
| वै | वै (अव्ययः) |
| स्तनान्तरम् | स्तनान्तर (१.१) |
| कः | क (१.१)–क (१.१) |
| क्रीडति | क्रीडति (√क्रीड् लट् प्र.पु. एक.)–क्रीडति (√क्रीड् लट् प्र.पु. एक.) |
| सरोषेण | स (अव्ययः)–रोष (३.१)–स (अव्ययः)–रोष (३.१) |
| पञ्चवक्त्रेण | पञ्चन्–वक्त्र (३.१)–पञ्चन्–वक्त्र (३.१) |
| भोगिना | भोगिन् (३.१)–भोगिन् (३.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | शी | वि | ष | इ | व | क्रु | द्धः | श्व | सा | न्वा | क्य |
| म | भा | ष | थाः | के | न | ते | ना | ग | ना | सो | रु |
| वि | क्ष | तं | वै | स्त | ना | न्त | रम् | कः | क्री | ड | ति |
| स | रो | षे | ण | प | ञ्च | व | क्त्रे | ण | भो | गि | ना |