साब्रवीद्दत्तमेवेह मयाभिज्ञानमुत्तमम् ।
एतदेव हि रामस्य दृष्ट्वा मत्केशभूषणम् ।
श्रद्धेयं हनुमन्वाक्यं तव वीर भविष्यति ॥
साब्रवीद्दत्तमेवेह मयाभिज्ञानमुत्तमम् ।
एतदेव हि रामस्य दृष्ट्वा मत्केशभूषणम् ।
श्रद्धेयं हनुमन्वाक्यं तव वीर भविष्यति ॥
अन्वयः
मया mine, उत्तमम् best, अभिज्ञानम् identification, दत्तमेव already given, इति this, सा she, अब्रवीत् said, वीर hero, हनुमान् Hanuman, एतत् all this, मत्केशभूषणम् my jewel for the hair, दृष्ट्वा seeing, तव his, वाक्यम् words, रामस्य Rama's, श्रद्धेयम् what you tell, भविष्यति will believe.M N Dutt
“Ah!” (answered Sītā), "I have already furnished you with an excellent sign. This ornament, . Hanuman, when carefully examined by Rāma, O hero, shall render your words credible."Summary
"I have already given the best identification. When you hand this jewel used on my hair to him, he will believe what you tell him".पदच्छेदः
| साब्रवीद् | तद् (१.१)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| दत्तम् | दत्त (√दा + क्त, १.१) |
| एवेह | एव (अव्ययः)–इह (अव्ययः) |
| मयाभिज्ञानम् | मद् (३.१)–अभिज्ञान (१.१) |
| उत्तमम् | उत्तम (१.१) |
| एतद् | एतद् (२.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| मत्केशभूषणम् | मद्–केश–भूषण (२.१) |
| श्रद्धेयं | श्रद्धेय (√श्रद्-धा + कृत्, १.१) |
| हनुमन् | हनुमन्त् (८.१) |
| वाक्यं | वाक्य (१.१) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| वीर | वीर (८.१) |
| भविष्यति | भविष्यति (√भू लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | ब्र | वी | द्द | त्त | मे | वे | ह | म | या | भि | ज्ञा |
| न | मु | त्त | मम् | ए | त | दे | व | हि | रा | म | स्य |
| दृ | ष्ट्वा | म | त्के | श | भू | ष | णम् | श्र | द्धे | यं | ह |
| नु | म | न्वा | क्यं | त | व | वी | र | भ | वि | ष्य | ति |