इमं च तीव्रं मम शोकवेगं; रक्षोभिरेभिः परिभर्त्सनं च ।
ब्रूयास्तु रामस्य गतः समीपं; शिवश्च तेऽध्वास्तु हरिप्रवीर ॥
इमं च तीव्रं मम शोकवेगं; रक्षोभिरेभिः परिभर्त्सनं च ।
ब्रूयास्तु रामस्य गतः समीपं; शिवश्च तेऽध्वास्तु हरिप्रवीर ॥
अन्वयः
हरिप्रवीर foremost vanara, रामस्य to Rama, समीपम् near, गतः after going, मम my, इमम् this, तीव्रम् intense, शोकवेगम् of grief, एभिः by these, रक्षोभिः by the rakshasas, परिभर्त्सनं च threats also, ब्रूयाः you nararte, ते to you, अध्वा journey, शिवः happy, अस्तु let it be.M N Dutt
Do you narrate to Rāma this my terrible sorrow and the affliction by the she-demons. May good betide you, on your way, O foremost of the monkeys.'Summary
"Foremost vanara tell Rama about my intense grief as well as the threats of the demons. May your journey be happy.पदच्छेदः
| इमं | इदम् (२.१)–इदम् (२.१) |
| च | च (अव्ययः)–च (अव्ययः) |
| तीव्रं | तीव्र (२.१)–तीव्र (२.१) |
| मम | मद् (६.१)–मद् (६.१) |
| शोकवेगं | शोक–वेग (२.१)–शोक–वेग (२.१) |
| रक्षोभिर् | रक्षस् (३.३)–रक्षस् (३.३) |
| एभिः | इदम् (३.३)–इदम् (३.३) |
| परिभर्त्सनं | परिभर्त्सन (२.१)–परिभर्त्सन (२.१) |
| च | च (अव्ययः)–च (अव्ययः) |
| ब्रूयास्तु | ब्रूयाः (√ब्रू विधिलिङ् म.पु. )–तु (अव्ययः)–ब्रूयाः (√ब्रू विधिलिङ् म.पु. )–तु (अव्ययः) |
| रामस्य | राम (६.१)–राम (६.१) |
| गतः | गत (√गम् + क्त, १.१)–गत (√गम् + क्त, १.१) |
| समीपं | समीप (२.१)–समीप (२.१) |
| शिवश्च | शिव (१.१)–च (अव्ययः)–शिव (१.१)–च (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (६.१)–त्वद् (६.१) |
| ऽध्वास्तु | अध्वन् (१.१)–अस्तु (√अस् लोट् प्र.पु. एक.)–अध्वन् (१.१)–अस्तु (√अस् लोट् प्र.पु. एक.) |
| हरिप्रवीर | हरि–प्रवीर (८.१)–हरि–प्रवीर (८.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | मं | च | ती | व्रं | म | म | शो | क | वे | गं |
| र | क्षो | भि | रे | भिः | प | रि | भ | र्त्स | नं | च |
| ब्रू | या | स्तु | रा | म | स्य | ग | तः | स | मी | पं |
| शि | व | श्च | ते | ऽध्वा | स्तु | ह | रि | प्र | वी | र |