अहं तु तैः संयति चण्डविक्रमैः; समेत्य रक्षोभिरसंगविक्रमः ।
निहत्य तद्रावणचोदितं बलं; सुखं गमिष्यामि कपीश्वरालयम् ॥
अहं तु तैः संयति चण्डविक्रमैः; समेत्य रक्षोभिरसंगविक्रमः ।
निहत्य तद्रावणचोदितं बलं; सुखं गमिष्यामि कपीश्वरालयम् ॥
अन्वयः
अहं तु I on my part, चण्डविक्रमैः with those endowed with fierce strength, तैः with them, रक्षोभिः by demons, संयति in fight, समेत्य colliding, असह्यविक्रमः irresistible valour, रावणचोदितम् sent by Ravana, तत् that, बलम् army, निहत्य after destroying, सुखम् happily, कपीश्वरालयम् to the abode of vanaras, गमिष्यामि I will go.M N Dutt
And I with unpaired prowess battling with those terrific Rākşasa, and annihilating that host despatched by Rāvana, shall merrily journey to the abode of the monkey king.Summary
'I will fight with the ogres sent by Ravana, endowed with fierce strength and irresistible valour. After destroying their army I will go to the abode of vanaras happily'.पदच्छेदः
| अहं | मद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तैः | तद् (३.३) |
| संयति | संयत् (७.१) |
| चण्डविक्रमैः | चण्ड–विक्रम (३.३) |
| समेत्य | समेत्य (√समा-इ + ल्यप्) |
| रक्षोभिर् | रक्षस् (३.३) |
| असंगविक्रमः | असङ्ग–विक्रम (१.१) |
| निहत्य | निहत्य (√नि-हन् + ल्यप्) |
| तद् | तद् (२.१) |
| रावणचोदितं | रावण–चोदित (√चोदय् + क्त, २.१) |
| बलं | बल (२.१) |
| सुखं | सुख (२.१) |
| गमिष्यामि | गमिष्यामि (√गम् लृट् उ.पु. ) |
| कपीश्वरालयम् | कपि–ईश्वर–आलय (२.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | हं | तु | तैः | सं | य | ति | च | ण्ड | वि | क्र | मैः |
| स | मे | त्य | र | क्षो | भि | र | सं | ग | वि | क्र | मः |
| नि | ह | त्य | त | द्रा | व | ण | चो | दि | तं | ब | लं |
| सु | खं | ग | मि | ष्या | मि | क | पी | श्व | रा | ल | यम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||