रक्षांसि वक्षांसि च विक्षिपन्ति; गात्राणि कान्तासु च विक्षिपन्ति ।
ददर्श कान्ताश्च समालपन्ति; तथापरास्तत्र पुनः स्वपन्ति ॥
रक्षांसि वक्षांसि च विक्षिपन्ति; गात्राणि कान्तासु च विक्षिपन्ति ।
ददर्श कान्ताश्च समालपन्ति; तथापरास्तत्र पुनः स्वपन्ति ॥
अन्वयः
वक्षांसि their chests, विक्षिपन्ति expanding, कान्तासु women, गात्राणि limbs, विक्षिपन्ति placing, चित्राणि wonderful, रूपाणि forms, विक्षिपन्ति assuming, दृढानि powerful , चापानि bows, विक्षपन्ति drew, रक्षांसि demons.M N Dutt
(Hanumān saw) Raksasas striking at their chests (by way of challenge). sinking on the persons of their beloved, wearing diverse habiliments, or stretching their tough bows.Summary
The demons were seen expanding their chests sportively and caressing their wives by placing their limbs on them. They were assuming wonderful forms, and drawing their bows up to their ears.पदच्छेदः
| रक्षांसि | रक्षस् (१.३) |
| वक्षांसि | वक्षस् (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| विक्षिपन्ति | विक्षिपन्ति (√वि-क्षिप् लट् प्र.पु. बहु.) |
| गात्राणि | गात्र (२.३) |
| कान्तासु | कान्ता (७.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| विक्षिपन्ति | विक्षिपन्ति (√वि-क्षिप् लट् प्र.पु. बहु.) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| कान्ताश्च | कान्ता (१.३)–च (अव्ययः) |
| समालपन्ति | समालपन्ति (√समा-लप् लट् प्र.पु. बहु.) |
| तथापरास्तत्र | तथा (अव्ययः)–अपर (१.३)–तत्र (अव्ययः) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| स्वपन्ति | स्वपन्ति (√स्वप् लट् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | क्षां | सि | व | क्षां | सि | च | वि | क्षि | प | न्ति |
| गा | त्रा | णि | का | न्ता | सु | च | वि | क्षि | प | न्ति |
| द | द | र्श | का | न्ता | श्च | स | मा | ल | प | न्ति |
| त | था | प | रा | स्त | त्र | पु | नः | स्व | प | न्ति |