परस्परं चाधिकमाक्षिपन्ति; भुजांश्च पीनानधिविक्षिपन्ति ।
मत्तप्रलापानधिविक्षिपन्ति; मत्तानि चान्योन्यमधिक्षिपन्ति ॥
परस्परं चाधिकमाक्षिपन्ति; भुजांश्च पीनानधिविक्षिपन्ति ।
मत्तप्रलापानधिविक्षिपन्ति; मत्तानि चान्योन्यमधिक्षिपन्ति ॥
अन्वयः
परस्परम् among themselves, अधिकम् very much, आक्षिपन्ति ridiculing each other, पीनान् stout, भुजान् च arms and, अधिकं क्षिपन्ति excessively throwing, अधिकम् highly, मत्तप्रलापान् intoxicated and blabbering, क्षिपन्ति indulge in vulgar conversation, मत्तानि by intoxication, अन्योन्यं one to the other, अधिक्षिपन्ति quarrelling.M N Dutt
And (Raksasas) were parleying, moving about their plump arms, railing at each other; and throwing intemperate speeches at each other.Summary
The intoxicated demons were quarrelling, ridiculing one another bitterly and wildly throwing their stout arms on one another, indulging in incoherent talk, uttering vulgar words.पदच्छेदः
| परस्परं | परस्पर (२.१) |
| चाधिकम् | च (अव्ययः)–अधिक (२.१) |
| आक्षिपन्ति | आक्षिपन्ति (√आ-क्षिप् लट् प्र.पु. बहु.) |
| भुजांश्च | भुज (२.३)–च (अव्ययः) |
| पीनान् | पीन (२.३) |
| अधिविक्षिपन्ति | अधिविक्षिपन्ति (√अधिवि-क्षिप् लट् प्र.पु. बहु.) |
| मत्तप्रलापान् | मत्त (√मद् + क्त)–प्रलाप (२.३) |
| अधिविक्षिपन्ति | अधिविक्षिपन्ति (√अधिवि-क्षिप् लट् प्र.पु. बहु.) |
| मत्तानि | मत्त (√मद् + क्त, १.३) |
| चान्योन्यम् | च (अव्ययः)–अन्योन्य (२.१) |
| अधिक्षिपन्ति | अधिक्षिपन्ति (√अधि-क्षिप् लट् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | र | स्प | रं | चा | धि | क | मा | क्षि | प | न्ति |
| भु | जां | श्च | पी | ना | न | धि | वि | क्षि | प | न्ति |
| म | त्त | प्र | ला | पा | न | धि | वि | क्षि | प | न्ति |
| म | त्ता | नि | चा | न्यो | न्य | म | धि | क्षि | प | न्ति |