हंसो यथा राजतपञ्जरस्थः; सिंहो यथा मन्दरकन्दरस्थः ।
वीरो यथा गर्वितकुञ्जरस्थ;श्चन्द्रोऽपि बभ्राज तथाम्बरस्थः ॥
हंसो यथा राजतपञ्जरस्थः; सिंहो यथा मन्दरकन्दरस्थः ।
वीरो यथा गर्वितकुञ्जरस्थ;श्चन्द्रोऽपि बभ्राज तथाम्बरस्थः ॥
अन्वयः
राजतपञ्जरस्थः found in a silver cage, हंसः swan, यथा like that, मन्दरकन्दरस्थः in the caves of Mandara mountain, सिंहः lion, यथा like that, गर्वितकुञ्जरस्थः mounted on a proud elephant, वीरः hero, यथा like, अम्बरस्थः in the sky, चन्द्रः Moon, तथा in the same way, बभ्राज looked very lustrous.M N Dutt
Like a swan in a silver cage, like a lion in a cave in Mandara, like a hero on a haughty elephant, appeared the Moon in the middle of the sky.Summary
'Like a swan in a cage of silver, like a lion in a cave of Mandara mountain, like a hero on a proud, intoxicated elephant, the Moon shone in the sky.पदच्छेदः
| हंसो | हंस (१.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| राजतपञ्जरस्थः | राजत–पञ्जर–स्थ (१.१) |
| सिंहो | सिंह (१.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| मन्दरकन्दरस्थः | मन्दर–कन्दर–स्थ (१.१) |
| वीरो | वीर (१.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| गर्वितकुञ्जरस्थश् | गर्वित–कुञ्जर–स्थ (१.१) |
| चन्द्रो | चन्द्र (१.१) |
| ऽपि | अपि (अव्ययः) |
| बभ्राज | बभ्राज (√भ्राज् लिट् प्र.पु. एक.) |
| तथाम्बरस्थः | तथा (अव्ययः)–अम्बर–स्थ (१.१) |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| हं | सो | य | था | रा | ज | त | प | ञ्ज | र | स्थः |
| सिं | हो | य | था | म | न्द | र | क | न्द | र | स्थः |
| वी | रो | य | था | ग | र्वि | त | कु | ञ्ज | र | स्थ |
| श्च | न्द्रो | ऽपि | ब | भ्रा | ज | त | था | म्ब | र | स्थः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||