तेन शब्देन महता चैत्यपालाः शतं ययुः ।
गृहीत्वा विविधानस्त्रान्प्रासान्खड्गान्परश्वधान् ।
विसृजन्तो महाक्षया मारुतिं पर्यवारयन् ॥
तेन शब्देन महता चैत्यपालाः शतं ययुः ।
गृहीत्वा विविधानस्त्रान्प्रासान्खड्गान्परश्वधान् ।
विसृजन्तो महाक्षया मारुतिं पर्यवारयन् ॥
अन्वयः
महता with terrific, तेन शब्देन by that sound, शतम् hundred, चैत्यपालाः guards of the palace, विविधान् many, अस्त्रान् weapons, प्रासान् darts, खङ्गान् swords, परश्वथान् axes, गृहीत्वा after picking, ययुः marked, महाकायाः those of huge bodies, विसृजन्तः hurling, मारुतिम् Maruti, पर्यवारयन् surrounded.M N Dutt
In consequence of that mighty cry, an hundred guards attached to the Caitya sallied out, taking various weapons-bearded darts, scimitars and axes; and they surrounded the Wind-god's offspring, as he went on increasing his body.Summary
Hearing the terrific sound, a hundred gigantic guards of the palace set forth, holding different kinds of weapons like darts, swords and axes and hurled at Maruti surrounding him.पदच्छेदः
| तेन | तद् (३.१) |
| शब्देन | शब्द (३.१) |
| महता | महत् (३.१) |
| चैत्यपालाः | चैत्य–पाल (१.३) |
| शतं | शत (१.१) |
| ययुः | ययुः (√या लिट् प्र.पु. बहु.) |
| गृहीत्वा | गृहीत्वा (√ग्रह् + क्त्वा) |
| विविधान् | विविध (२.३) |
| अस्त्रान् | अस्त्र (२.३) |
| प्रासान् | प्रास (२.३) |
| खड्गान् | खड्ग (२.३) |
| परश्वधान् | परश्वध (२.३) |
| विसृजन्तो | विसृजत् (√वि-सृज् + शतृ, १.३) |
| महाकाया | महत्–काय (१.३) |
| मारुतिं | मारुति (२.१) |
| पर्यवारयन् | पर्यवारयन् (√परि-वारय् लङ् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | न | श | ब्दे | न | म | ह | ता | चै | त्य | पा | लाः |
| श | तं | य | युः | गृ | ही | त्वा | वि | वि | धा | न | स्त्रा |
| न्प्रा | सा | न्ख | ड्गा | न्प | र | श्व | धान् | वि | सृ | ज | न्तो |
| म | हा | क्ष | या | मा | रु | तिं | प | र्य | वा | र | यन् |