अन्वयः
सर्वरक्षसाम् all ogres, मिषताम् as they gaze, लङ्कां पुरीम् city of Lanka, अर्दयित्वा shall destroy, मैथिलीम् to Mythili, अभिवाद्य च and pay respects, समृद्धार्थः having accomplished my purpose, गमिष्यामि I will return.
Summary
"I shall destroy the city of Lanka and pay my respects to Mythili right under the nose of all demons. I will return with my purpose accomplished.
पदच्छेदः
| अर्दयित्वा | अर्दयित्वा (√अर्दय् + क्त्वा) |
| पुरीं | पुरी (२.१) |
| लङ्काम् | लङ्का (२.१) |
| अभिवाद्य | अभिवाद्य (√अभि-वादय् + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| मैथिलीम् | मैथिली (२.१) |
| समृद्धार्थो | समृद्ध (√सम्-ऋध् + क्त)–अर्थ (१.१) |
| गमिष्यामि | गमिष्यामि (√गम् लृट् उ.पु. ) |
| मिषतां | मिषत् (√मिष् + शतृ, ६.३) |
| सर्वरक्षसाम् | सर्व–रक्षस् (६.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | र्द | यि | त्वा | पु | रीं | ल | ङ्का |
| म | भि | वा | द्य | च | मै | थि | लीम् |
| स | मृ | द्धा | र्थो | ग | मि | ष्या | मि |
| मि | ष | तां | स | र्व | र | क्ष | साम् |